दलित पत्रकार से मारपीट, अवैध हिरासत और पुलिस पर गंभीर आरोप; पीड़ित परिवार पहुंचा कोर्ट - Time TV Network

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दलित पत्रकार से मारपीट, अवैध हिरासत और पुलिस पर गंभीर आरोप; पीड़ित परिवार पहुंचा कोर्ट

 

एटा। जनपद एटा में एक दलित पत्रकार और उसके परिवार के साथ कथित मारपीट, अवैध हिरासत तथा पुलिस की कार्यशैली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गांव के कुछ दबंगों ने पत्रकार के साथ बेरहमी से मारपीट की और बाद में थाना पिलुआ पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उल्टा पीड़ित को ही दो दिन तक थाने में बैठाए रखा। न्याय न मिलने पर परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत करने के साथ-साथ न्यायालय की शरण ली है।

पीड़िता ज्योति पत्नी विशाल माथुर, निवासी ग्राम सुन्ना, थाना पिलुआ ने बताया कि उनके पति विशाल माथुर, जो एक समाचार पत्र से जुड़े पत्रकार हैं, 12 जुलाई को बीमारी के कारण अपने बड़े भाई के घर आराम कर रहे थे। इसी दौरान घर से चार्जिंग पर लगा मोबाइल फोन और अलमारी में रखे 22,400 रुपये चोरी हो गए। परिवार ने थाना पिलुआ में इसकी शिकायत दी और गांव के एक व्यक्ति पर संदेह जताया।

चोरी के शक के बाद हुआ हमला

पीड़िता का आरोप है कि चोरी की जानकारी पुलिस को देने और एक व्यक्ति पर संदेह जताने से वह रंजिश मान बैठा। इसके बाद 20 जुलाई की शाम बाजार से लौट रहे विशाल माथुर को कथित रूप से कई लोगों ने घेर लिया और लात-घूंसों से जमकर मारपीट की। शोर सुनकर जब पत्नी ज्योति मौके पर पहुंचीं और पति को बचाने का प्रयास किया तो उनके साथ भी अभद्रता की गई तथा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया।




'रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय पीड़ित को ही बैठा लिया'

ज्योति का कहना है कि घायल पति को लेकर वह सीधे थाना पिलुआ पहुंचीं। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण तो कराया, लेकिन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बजाय उनके पति विशाल माथुर और बाद में जेठ सुरजीत कुमार को भी थाने में बैठा लिया।

परिवार का आरोप है कि दोनों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया। कई बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें नहीं छोड़ा गया, जिसके बाद 21 जुलाई को पीड़िता अपनी जेठानी रूबी के साथ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं और लिखित शिकायत दी। साथ ही डाक के माध्यम से भी प्रार्थना पत्र भेजा।

पुलिसकर्मियों पर रिश्वत और मारपीट के आरोप

पीड़िता ने आरोप लगाया कि सुरजीत कुमार को छोड़ दिया गया, लेकिन विशाल माथुर को लगभग 24 घंटे तक थाने में रखा गया। आरोप है कि उन्हें छोड़ने के लिए 5 हजार रुपये की मांग की गई, विपक्षी पक्ष से समझौते का दबाव बनाया गया और मना करने पर जेल भेजने की धमकी दी गई। साथ ही कुछ पुलिसकर्मियों पर गाली-गलौज और मारपीट करने के भी आरोप लगाए गए हैं।

कोर्ट पहुंचा मामला, दोनों पक्षों पर दर्ज हुए मुकदमे

पीड़ित परिवार का कहना है कि न्यायालय में वाद दायर किए जाने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से मुकदमे दर्ज किए। परिवार का आरोप है कि विपक्षी पक्ष की शिकायत पर उनके खिलाफ भी झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जबकि उनकी शिकायत पर पांच नामजद लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज हुआ।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें स्थानीय पुलिस की निष्पक्ष जांच पर भरोसा नहीं है और अब उन्हें न्यायालय से ही न्याय मिलने की उम्मीद है।

आरोपित पक्ष और पुलिस का पक्ष

इस मामले में पीड़ित परिवार ने गांव के पांच नामजद लोगों तथा थाना पिलुआ के तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत कुछ पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों और दूसरे पक्ष का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मामले की सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

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