उत्तर प्रदेश के कासगंज रेलवे स्टेशन से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने गरीब ई-रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि रेलवे स्टेशन पर ठेकेदार के लोग नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम जबरन वसूली कर रहे हैं। ई-रिक्शा चालक डर और दबाव में पैसा देने को मजबूर हैं।
पूरी खबर:
कासगंज। रेलवे स्टेशन परिसर में ई-रिक्शा चालकों से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्टेशन पर तैनात ठेकेदार और उसके कर्मचारी नियमों की अनदेखी करते हुए गरीब चालकों पर दबंगई दिखा रहे हैं। पीड़ित ई-रिक्शा चालक पुष्पेंद्र, निवासी नगला वाले, का आरोप है कि रविवार सुबह वह केवल भारी सामान के साथ यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर उतारने पहुंचा था। उसने स्टेशन से कोई सवारी नहीं उठाई थी। इसके बावजूद ठेकेदार के कर्मचारियों ने उसे रोककर जबरन पर्ची थमा दी और शुल्क जमा करने का दबाव बनाया।
ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि नियम के अनुसार शुल्क तभी लिया जाना चाहिए जब वाहन स्टेशन से सवारी लेकर बाहर जाए, लेकिन यहां केवल यात्रियों को छोड़ने पर भी जबरन पर्ची काटी जा रही है। विरोध करने पर कथित तौर पर धमकाया जाता है, जिसके कारण अधिकांश चालक चुप रहने को मजबूर हैं। गरीब चालकों का आरोप है कि यह कथित वसूली लंबे समय से जारी है और प्रशासन तक शिकायतें पहुंचने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि दिनभर मेहनत करके जो थोड़ी-बहुत कमाई होती है, उसका एक हिस्सा इस तरह की जबरन वसूली में चला जाता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नियमों के विपरीत वसूली की जा रही है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या रेलवे प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे, या फिर गरीब ई-रिक्शा चालक इसी तरह कथित दबंगई का शिकार होते रहेंगे?
नोट: यह खबर पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही अंतिम तथ्य स्पष्ट होंगे। यदि ठेकेदार या रेलवे प्रशासन का पक्ष उपलब्ध होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
