काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान ने किया अभियान का ऐलान, जागरूकता से लेकर कानूनी कार्रवाई तक होगी पहल
कासगंज। विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के अवसर पर बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कार्यरत काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान ने जनपद कासगंज में बच्चों की ट्रैफिकिंग (बाल दुर्व्यापार) के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने का ऐलान किया है। संस्था ने कहा है कि सरकार, जिला प्रशासन और आम नागरिकों के सहयोग से जिले में बाल तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए जागरूकता अभियान, ट्रैफिकरों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संस्था की सचिव मीना सिंह ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर और हाशिए पर रह रहे परिवारों की पहचान कर उनके बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि वे शिक्षा से जुड़े रहें और ट्रैफिकिंग गिरोहों के झांसे में आने से बच सकें। साथ ही ट्रैफिकिंग से मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यह घोषणा नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श "इंश्योरिंग ए चाइल्ड राइट्स, पोटेंशियल एंड प्रास्पेरिटी" के दौरान की गई। इस कार्यक्रम में देशभर के 782 जिलों से आए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसी दौरान 'नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग' की शुरुआत की गई, जो वर्ष 2030 तक चलेगा।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि किसी भी बच्चे को ट्रैफिकिंग और शोषण से बचाना सबसे बड़ा मानवीय कार्य है। उन्होंने कहा कि नागरिक समाज संगठन उन बच्चों के लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं, जिन्हें यौन शोषण और बंधुआ मजदूरी जैसे अमानवीय अपराधों से मुक्त कराया जाता है।
मीना सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर घंटे 11 बच्चे लापता हो जाते हैं और प्रतिदिन कई बच्चे मानव तस्करी तथा जबरन मजदूरी का शिकार बनते हैं। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है, जिसमें महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक निशाना बनाए जाते हैं।
संस्था ने स्पष्ट किया कि अब कासगंज में बाल ट्रैफिकिंग के खिलाफ जन-जागरूकता, कानूनी कार्रवाई और पीड़ित बच्चों के पुनर्वास को लेकर लगातार अभियान चलाया जाएगा, ताकि जिले को बाल तस्करी मुक्त बनाया जा सके।

