₹10 हजार की रिश्वत का आरोप! पैसे लेने के बाद भी नहीं बदला ट्रांसफॉर्मर, किसान परेसान ,अंधेरे में जीने को मजबूर पूरा गांव" - Time TV Network

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₹10 हजार की रिश्वत का आरोप! पैसे लेने के बाद भी नहीं बदला ट्रांसफॉर्मर, किसान परेसान ,अंधेरे में जीने को मजबूर पूरा गांव"

 कासगंज के गंगागढ़ गांव के ग्रामीणों का आरोप—भिटौना बिजलीघर के जेई विजेन्द्र ने लाइनमैन मुकेश के जरिए ₹10 हजार मांगे, ₹7 हजार देने के बाद भी नहीं लगा नया ट्रांसफॉर्मर।


कासगंज। उत्तर प्रदेश के कासगंज जनपद के गंगागढ़ गांव से बिजली विभाग में कथित भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई दिनों से गांव का ट्रांसफॉर्मर खराब पड़ा हुआ है, जिससे पूरा गांव अंधेरे में रहने को मजबूर है। आरोप है कि नया ट्रांसफॉर्मर लगाने के लिए भिटौना बिजलीघर के जेई विजेन्द्र ने लाइनमैन मुकेश के माध्यम से ₹10 हजार की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने ₹7 हजार दे भी दिए, लेकिन इसके बावजूद आज तक नया ट्रांसफॉर्मर नहीं लगाया गया।


ग्रामीणों के अनुसार, बिजली न होने से पेयजल, खेती, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। भीषण गर्मी में लोग भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से भी की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि वीडियो में कई लोग खुलकर जेई पर पैसे लेने के आरोप लगा रहे हैं।


यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आम नागरिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी ट्रांसफॉर्मर बदलवाने के लिए रिश्वत देना अनिवार्य है? यदि नहीं, तो फिर ग्रामीणों से कथित रूप से पैसे क्यों मांगे गए?


ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के उच्च अधिकारियों, जिला प्रशासन और शासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि रिश्वत लेने के आरोप सही पाए जाएं, तो संबंधित जेई और लाइनमैन के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण कानून तथा विभागीय नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी ग्रामीण को बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए कथित तौर पर रिश्वत न देनी पड़े।


नोट: यह खबर ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके दावों पर आधारित है। आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष तय किया जा सकता है। टाइम टी वी किसी भी प्रकार के आरपों की पुष्टि नहीं करता।


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