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एटा वन विभाग में बवाल: स्टेनो पर तमंचा लेकर हमला करने के आरोप, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों से खुल सकते हैं कई राज

एटा,

नपद एटा के वन विभाग से जुड़ा एक गंभीर विवाद सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के आचरण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला 8 जून 2026 की रात का बताया जा रहा है, जब जीटी रोड स्थित कृपाल होटल में वन विभाग के कुछ कर्मचारी मौजूद थे। इसी दौरान हुए विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है।

पीड़ित पक्ष द्वारा दी गई तहरीर में वन विभाग के स्टेनो पुष्पेंद्र कुमार और उनके साथियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। तहरीर के अनुसार होटल परिसर में विवाद हुआ और कथित रूप से हथियार दिखाकर धमकाने तथा हमला करने जैसी घटनाएं हुईं। इन आरोपों की जांच अभी संबंधित अधिकारियों द्वारा की जानी बाकी है।


सीसीटीवी फुटेज बन सकती है जांच की सबसे बड़ी कड़ी

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह बताया जा रहा है कि घटना स्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। पीड़ित पक्ष ने अपनी शिकायत में फुटेज की जांच कराने की मांग की है। यदि फुटेज सुरक्षित है और जांच एजेंसियों के कब्जे में आती है, तो घटना के वास्तविक घटनाक्रम का खुलासा हो सकता है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि होटल परिसर में हुई कहासुनी और विवाद की जानकारी कई लोगों को है। ऐसे में सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

वन विभाग के कर्मचारियों के नाम भी बताए जा रहे हैं गवाह

शिकायत में कथित तौर पर वन विभाग के कई कर्मचारियों का उल्लेख गवाहों के रूप में किया गया है। यदि जांच एजेंसियां उनके बयान दर्ज करती हैं, तो मामले की दिशा स्पष्ट हो सकती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि घटना के समय विभागीय कर्मचारी मौके पर मौजूद थे, तो उन्होंने अब तक क्या देखा और क्या जानकारी दी है।


पुराने विवादों की भी हो रही चर्चा

घटना के सामने आने के बाद संबंधित स्टेनो के नाम से जुड़े पुराने विवादों की भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोगों का दावा है कि पूर्व में भी उनके खिलाफ शिकायतें और विवाद सामने आए थे। आरोप है कि पहले भी पुष्पेंद्र ने विधायक की मोहर व हस्ताक्षर का भी दुरपयोग किया था जिससे वो सवालों के घेरे में उलझ गए थे । हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और किसी भी पुराने मामले पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित अभिलेखों एवं जांच रिपोर्टों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

विभागीय छवि पर उठ रहे सवाल

वन विभाग एक जिम्मेदार सरकारी विभाग माना जाता है। ऐसे में यदि विभाग के कर्मचारियों के बीच सार्वजनिक स्थान पर विवाद हुआ है, तो यह विभागीय अनुशासन पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि पुलिस और प्रशासन सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराएं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, और यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो वह भी सार्वजनिक किया जाए।

पहली नजर में गंभीर प्रतीत हो रहा मामला

कृपाल होटल में विवाद होने की बात कई स्रोतों से सामने आने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में यह मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर इसकी गंभीर जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासनिक और पुलिस जांच की निगाहें टिकी हुई हैं। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और जांच रिपोर्ट ही तय करेंगे कि उस रात कृपाल होटल में वास्तव में क्या हुआ था।

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