रामवाली कॉलोनी में सार्वजनिक सुविधाओं पर सवाल: 17 में से 5 सुलभ शौचालय बंद, आम जनता परेशान - Time TV Network

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रामवाली कॉलोनी में सार्वजनिक सुविधाओं पर सवाल: 17 में से 5 सुलभ शौचालय बंद, आम जनता परेशान

कासगंज,

 स्वच्छ भारत मिशन के तहत देशभर में करोड़ों रुपये खर्च कर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया ताकि आम नागरिकों को स्वच्छ और सम्मानजनक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। लेकिन नगर पालिका क्षेत्र रामवली कॉलोनी (सिटी मोहल्ला)  में जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यहां स्थापित सार्वजनिक शौचालय की स्थिति गंभीर है आसपास अतिक्रमण,गन्दगी,गटर टूटा, पास बने धर्मस्थल पर पहुंच रही ठेस लोग काफी परेशान। वहीं कासगंज रामवली कॉलोनी नगर पँचायत क्षेत्र की बात करें तो लगभग 17 सार्वजनिक शौचालयों में से 5 शौचालय लंबे समय से बंद पड़े हैं, जबकि कई अन्य शौचालय जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। इससे न केवल स्थानीय नागरिकों बल्कि महिलाओं, बुजुर्गों, विद्यार्थियों और राहगीरों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।


यह स्थिति नगर पालिका की कार्यप्रणाली, रखरखाव व्यवस्था और स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन सुविधाओं के निर्माण पर सरकारी धन खर्च किया गया, वे आज उपयोग के बजाय उपेक्षा और अव्यवस्था की शिकार हो चुकी हैं।

जनता की सुविधा के लिए बने थे शौचालय

स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नगर पालिका क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था। इनका उद्देश्य खुले में शौच की समस्या को समाप्त करना, शहर को स्वच्छ बनाना तथा महिलाओं और यात्रियों को सुरक्षित एवं स्वच्छ सुविधा उपलब्ध कराना था। नगर क्षेत्र के प्रमुख स्थानों जैसे रामवली कॉलोनी, अशोक नगर मार्ग, रोडवेज बस स्टैंड के आसपास तथा अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में इन शौचालयों का निर्माण कराया गया था। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि पांच शौचालय पूरी तरह बंद हैं और कई स्थानों पर शौचालयों की हालत बेहद खराब बताई जा रही है।


बंद पड़े शौचालय बने परेशानी का कारण

स्थानीय निवासियों के अनुसार कई शौचालयों के मुख्य द्वारों पर हमेशा ताला लटका रहता है। कुछ स्थानों पर भवन जर्जर हो चुके हैं और उनकी मरम्मत की आवश्यकता है। इससे आम नागरिकों को मजबूरन वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ती है।

रामवली कॉलोनी निवासी मंगल सिंह का कहना है कि कॉलोनी में स्थित शौचालय करीब दस वर्षों से लोगों की सुविधा का केंद्र रहा है, लेकिन अब उसकी स्थिति खराब होती जा रही है। लोगों को नियमित सुविधा नहीं मिल पा रही है।

वहीं क्षेत्र के अन्य लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय बंद होने से सबसे अधिक परेशानी महिलाओं और बुजुर्गों को होती है। कई बार बाहर से आने वाले यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

रखरखाव पर उठ रहे सवाल

सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के बाद उनके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों तथा नगर निकायों को सौंपी जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि पांच शौचालय लंबे समय से बंद हैं तो उनकी नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यदि समय रहते रखरखाव किया जाता तो शौचालयों की यह स्थिति नहीं होती। कई लोगों का कहना है कि जिम्मेदार विभाग केवल निर्माण तक सीमित रह जाते हैं, जबकि बाद में रखरखाव की व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक सुविधा की सफलता केवल उसके निर्माण में नहीं बल्कि उसके निरंतर संचालन और रखरखाव में होती है। यदि रखरखाव नहीं होगा तो करोड़ों रुपये की योजनाएं धीरे-धीरे निष्प्रभावी हो जाती हैं।

स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों पर असर

स्वच्छ भारत मिशन का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता को बढ़ावा देना और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है। सार्वजनिक शौचालय इस अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं।

लेकिन जब सार्वजनिक शौचालय बंद मिलते हैं या उपयोग योग्य स्थिति में नहीं होते, तो इसका सीधा असर मिशन की प्रभावशीलता पर पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी तो स्वच्छता अभियान के लक्ष्य भी प्रभावित होंगे।

नगर पालिका का पक्ष

नगर पालिका से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नगर क्षेत्र में कुल 17 सार्वजनिक शौचालय हैं, जिनमें से अधिकांश संचालित हो रहे हैं। कुछ शौचालय जर्जर हो चुके हैं और उनके पुनर्निर्माण अथवा मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार जल्द ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराकर बंद पड़े शौचालयों को पुनः चालू कराने का प्रयास किया जाएगा ताकि लोगों को सुविधा मिल सके।

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा। जनता चाहती है कि जल्द से जल्द धरातल पर कार्रवाई दिखाई दे। 

सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार सार्वजनिक शौचालयों की अनुपलब्धता केवल सुविधा का मुद्दा नहीं है बल्कि यह स्वास्थ्य और स्वच्छता से भी जुड़ा विषय है। यदि लोगों को सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध नहीं होंगे तो इससे गंदगी बढ़ सकती है और संक्रमण फैलने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है।

महिलाओं के लिए यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है क्योंकि उन्हें सुरक्षित एवं स्वच्छ शौचालयों की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को भी विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों की मांग

रामवाली कॉलोनी के क्षेत्रीय नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़े सभी शौचालयों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और उनकी मरम्मत कराकर उन्हें पुनः संचालित किया जाए। साथ ही नियमित सफाई, पानी की व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

लोगों का कहना है कि सार्वजनिक धन से बनी सुविधाओं का लाभ जनता को मिलना चाहिए। यदि सुविधाएं बंद पड़ी रहेंगी तो सरकारी योजनाओं का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा।

जवाबदेही तय करने की जरूरत

सार्वजनिक सुविधाओं के संचालन में जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी शौचालय का संचालन बंद है या वह उपयोग योग्य नहीं है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर निरीक्षण और सामाजिक ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएं ताकि ऐसी समस्याएं सामने आते ही उनका समाधान किया जा सके।

रामवाली कॉलोनी की नगर पालिका क्षेत्र में 17 में से 5 सार्वजनिक शौचालयों का बंद होना एक ऐसा मुद्दा है जो सीधे तौर पर आम जनता की दैनिक जरूरतों से जुड़ा हुआ है। यह मामला केवल एक सुविधा के बंद होने का नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, रखरखाव व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है।

अब निगाहें नगर पालिका प्रशासन और संबंधित अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी करते हैं। यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए तो न केवल जनता को राहत मिलेगी बल्कि स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को भी मजबूती मिलेगी। वहीं यदि स्थिति यथावत बनी रही तो जनता के बीच असंतोष बढ़ना तय है और सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठते रहेंगे।

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