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कासगंज में ‘आवारा पशु आतंक-एक ही रात में तीन किसानों की मेहनत पर चला कहर, मुआवज़े की गुहार

 जनपद कासगंज के गाँव भगवंतपुर पुल के पास उस समय मातम जैसा माहौल बन गया, जब सुबह की पहली किरण के साथ किसानों ने अपने खेतों का रुख किया और सामने का दृश्य देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। रात के अंधेरे में लगभग 30 से 40 आवारा गायों का झुंड खेतों में घुस आया और लहलहाती गेहूं की फसल को पूरी तरह तहस-नहस कर गया।

तीन किसानों के खेतों में खड़ी फसल इस कदर बर्बाद हुई कि खेतों में हरियाली की जगह सिर्फ उजड़ी हुई मिट्टी और टूटे पौधे नजर आ रहे थे।

इस घटना ने न सिर्फ किसानों की आर्थिक कमर तोड़ी है बल्कि उनके परिवारों के सामने भी रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है।


 सुबह का मंजर – हरियाली की जगह बर्बादी

सुबह जब किसान अनिल कुमार पुत्र श्री केशव सिंह, रवि प्रकाश निवासी भगवंतपुर और करन सिंह निवासी नगला ढक अपने खेतों पर पहुँचे तो वहां का दृश्य देखकर उनकी आंखें नम हो गईं।

जहाँ कुछ दिन पहले तक गेहूं की लहलहाती फसल हवा के साथ झूम रही थी,

वहीं अब 

पूरी फसल जमीन पर पड़ी थी

पौधे जड़ों समेत उखड़े हुए थे

खेतों में जगह-जगह पशुओं के पैरों के निशान थे

चारों ओर गोबर और बर्बादी का मंजर था

किसानों के अनुसार यह झुंड रात के समय खेतों में घुसा और घंटों तक फसल चरता रहा।

हम बर्बाद हो गए… किसानों का दर्द

पीड़ित किसान अनिल कुमार ने रोते हुए बताया:

पूरे साल की मेहनत थी… खाद, बीज, सिंचाई सब कुछ उधार लेकर किया था… अब कुछ भी नहीं बचा…

रवि प्रकाश ने कहा

अब बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी, घर कैसे चलेगा… सरकार से मदद नहीं मिली तो भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।

करन सिंह का दर्द भी छलक पड़ा

रात भर में सब खत्म हो गया… खेत में गेहूं की एक बाल भी खड़ी नहीं बची…

कितने का हुआ नुकसान?

प्राथमिक अनुमान के अनुसार तीनों किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

नुकसान में शामिल है

गेहूं की तैयार खड़ी फसल

बीज और खाद की लागत

सिंचाई का खर्च

खेत की जुताई व मजदूरी

यानि सिर्फ फसल ही नहीं, पूरे सीजन की पूंजी खत्म हो गई।

 आवारा पशु – किसानों के लिए बनता जा रहा अभिशाप

यह कोई पहली घटना नहीं है।

कासगंज और आसपास के इलाकों में आवारा पशुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है।

रात होते ही

झुंड के झुंड खेतों में घुस जाते हैं

किसानों को रात भर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है

ठंड में खुले आसमान के नीचे जागना मजबूरी बन गया है

किसानों का कहना है कि

 सरकार गौ-संरक्षण की बात करती है

 लेकिन खेतों को बचाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।


 जिम्मेदार कौन?

सबसे बड़ा सवाल यही है

आखिर इन आवारा पशुओं की जिम्मेदारी किसकी है?

गौशालाओं में जगह क्यों नहीं?

प्रशासन की निगरानी कहाँ है?

ग्रामीणों का आरोप है कि

क्षेत्र में बनी गौशालाएं क्षमता से कम हैं

कई जगहों पर सिर्फ कागजों में व्यवस्थाएं हैं

आवारा पशु खुले घूम रहे हैं

 योगी सरकार से मुआवज़े की मांग

घटना के बाद सभी पीड़ित किसानों और ग्रामीणों ने एक स्वर में योगी सरकार से मुआवज़े की मांग की है।

उनकी प्रमुख मांगें

 फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए

 तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए

 आवारा पशुओं से स्थायी समाधान किया जाए

 रात में निगरानी की व्यवस्था हो

 ग्रामीणों में भारी आक्रोश

घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और दुख का माहौल है।

ग्रामीणों का कहना है

अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन होगा।

किसानों का साफ कहना है कि

अब सिर्फ आश्वासन नहीं, जमीन पर समाधान चाहिए।

 रात का डर – दिन की बेबसी

इस घटना के बाद क्षेत्र के किसान दहशत में हैं।

अब हालात ये हैं

किसान रात भर खेतों में पहरा देने को मजबूर

परिवार की नींद छिन गई

हर रात फसल पर खतरा

 प्रशासन से अपील

किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:

मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन किया जाए

पीड़ित किसानों को तत्काल राहत दी जाए

आवारा पशुओं को पकड़कर गौशाला भेजा जाए

 क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ?

कृषि जानकारों के अनुसार:

यदि फसल कटाई से पहले इस तरह बर्बाद हो जाए तो किसान को 100% नुकसान माना जाता है क्योंकि

लागत निकलना असंभव

अगली बुवाई के लिए पूंजी खत्म

कर्ज का दबाव बढ़ जाता है

 सिर्फ फसल नहीं टूटा हौसला भी

यह घटना सिर्फ खेतों की बर्बादी नहीं है,

यह किसानों की उम्मीदों, सपनों और भविष्य पर पड़ा एक बड़ा वार है।

जिस फसल से

बच्चों की पढ़ाई होनी थी

घर का खर्च चलना था

कर्ज उतरना था

वही फसल अब मिट्टी में मिल चुकी है।

 बड़ा सवाल – क्या किसान ऐसे ही बर्बाद होते रहेंगे?

हर बार

सर्वे

आश्वासन

जांच

लेकिन ज़मीनी समाधान कब?

क्या किसान यूँ ही आवारा पशुओं के आतंक से बर्बाद होते रहेंगे?

 निष्कर्ष

कासगंज के भगवंतपुर पुल के पास हुई यह घटना

एक बड़ी चेतावनी है।

यदि समय रहते

आवारा पशुओं की समस्या का समाधान

पीड़ित किसानों को मुआवज़ा

सुरक्षा व्यवस्था

नहीं की गई,

तो यह मुद्दा आने वाले समय में बड़े किसान आंदोलन का रूप ले सकता है।

 किसानों की सरकार से आख़िरी गुहार

हमें दया नहीं हक चाहिए…

हमारी फसल बचाइए…

हमारा भविष्य बचाइए…

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