सरकारी रास्ता, लेकिन दबंगों का कब्ज़ा, धमकियों के साये में जी रहे ग्रामीण, आम रास्ता पर भरे पानी में निकलना मुश्किल , न्याय की मांग - Time TV Network

Breaking news

Post Top Ad

Post Top Ad

सरकारी रास्ता, लेकिन दबंगों का कब्ज़ा, धमकियों के साये में जी रहे ग्रामीण, आम रास्ता पर भरे पानी में निकलना मुश्किल , न्याय की मांग

 एटा ,विकास खण्ड मारहरा,गांव नगला कनही में दबंगों का कब्ज़ा, सरकारी रास्ता बना निजी जागीर , प्रधान की शिकायत के बावजूद अतिक्रमण बरकरार, ग्रामीणों को धमकी, ट्रैक्टर तक नहीं निकल पा रहे।


एटा (मारहरा)।

जनपद एटा के विकास खण्ड मारहरा अंतर्गत ग्राम पंचायत सींय के गांव नगला कनही में दबंगई और अतिक्रमण का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ सरकारी अभिलेखों में दर्ज रास्ता संख्या 452स (रकबा 0.154 हेक्टेयर) पर गांव के ही कुछ दबंग एवं शातिर किस्म के लोगों द्वारा खुलेआम अनाधिकृत कब्जा कर लिया गया है। जिससे हालात ऐसे बन गए हैं कि गांव का आम रास्ता रास्ता नहीं रहा पानी से सराबोर रास्ता अब तालाब सा बन गया है ग्रामीणों का खेतों तक आना-जाना दूभर हो गया है, ट्रैक्टर और कृषि यंत्र रास्ते में फँस जाते हैं, और विरोध करने पर दबंग मारपीट पर आमादा हो जाते हैं।


सरकारी रास्ता, लेकिन दबंगों का कब्ज़ा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव के निवासी मौहरपाल पुत्र उल्फति एवं विशेष कुमार पुत्र श्रीराम सहित कुछ अन्य लोगों द्वारा इस चक रोड/ग्राम रास्ते पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर रखा है। शिकायत में कहा गया है कि यह रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज है, इसके बावजूद दबंगों ने इसे अपनी निजी जागीर समझ लिया है।


ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी कोई किसान इस रास्ते से निकलने की कोशिश करता है या अतिक्रमण हटाने की बात करता है, तो दबंग लोग लड़ाई-झगड़े पर उतारू हो जाते हैं और खुलेआम धमकियाँ देते हैं।


धमकियों के साये में जी रहे ग्रामीण

ग्राम पंचायत के वर्तमान प्रधान रमन द्वारा प्रशासन को दी गई शिकायत में साफ लिखा गया है कि दबंग किस्म के लोग लगातार ग्रामीणों को धमका रहे हैं। इससे गांव में भय का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि-

खेतों तक पहुँचने का यह मुख्य रास्ता है

ट्रैक्टर, ट्रॉली और कृषि यंत्र नहीं निकल पा रहे

फसल की जुताई-बुवाई प्रभावित हो रही है

विरोध करने पर जान-माल का खतरा बना रहता है

एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,

“अगर हम रास्ते से निकलते हैं तो गाली-गलौज होती है। कहते हैं कि रास्ता उनका है। पुलिस और प्रशासन का नाम लेने पर और भड़क जाते हैं।”


प्रधान ने उठाया सवाल-काग़ज़ों में रास्ता, ज़मीन पर कब्ज़ा क्यों?

ग्राम प्रधान रमन ने अपनी शिकायत में प्रशासन से साफ शब्दों में मांग की है कि-

● रास्ता संख्या 452स की राजस्व पैमाइश कराई जाए

● राजस्व टीम गठित की जाए

● पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटवाया जाए

● रास्ते पर मिट्टी डलवाकर आवागमन योग्य बनाया जाए

प्रधान का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े विवाद या हिंसक घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।



प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्राम प्रधान स्वयं लिखित रूप से शिकायत कर चुके हैं, रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है, तो अब तक अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया?

क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?

क्या दबंगों के आगे सिस्टम बेबस हो चुका है?

ग्रामीणों का आरोप है कि इससे पहले भी मौखिक रूप से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न पैमाइश कराई गई, न अतिक्रमण हटाया गया।

न्यायहित में तत्काल कार्रवाई की मांग

गांव के लोगों ने जिला प्रशासन और तहसील अधिकारियों से मांग की है कि-

बिना देरी के मौके पर टीम भेजी जाए

अवैध अतिक्रमण हटाया जाए

दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए

ग्रामीणों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रास्ते पर कब्ज़ा सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि किसानों के हक़ पर सीधा हमला है।

अब सवाल ये है…

क्या एटा प्रशासन इस मामले में सख़्त कदम उठाएगा?

क्या दबंगों की दबंगई पर लगाम लगेगी?

या फिर सरकारी रास्ते यूँ ही निजी कब्ज़े में तब्दील होते रहेंगे?

ग्रामपंचायत सींय के गांव नगला कन्हई का यह मामला सिर्फ एक रास्ते का नहीं, बल्कि कानून बनाम दबंगई की खुली जंग का प्रतीक बन चुका है। अब देखना यह है कि जीत किसकी होती है-कानून की या दबंगों की।

Post Top Ad