एटा में सागौन की गाड़ी छोड़ने के आरोप से मचा हड़कंप, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद। - Time TV Network

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एटा में सागौन की गाड़ी छोड़ने के आरोप से मचा हड़कंप, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद।

नपद एटा के थाना कोतवाली देहात क्षेत्र अंतर्गत लिप्टन चौकी के गांव दुल्हापुर में उस समय हड़कंप मच गया जब ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। आरोप है कि चोब सिंह के खेत से पकड़ी गई सागौन की भरी गाड़ी को छोड़ने के बदले करीब 70 हजार रुपये लेने की बात सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और अधिक गरमा गया है। फिलहाल जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ता जा रहा है।


मामला क्या है ? - आरोपों की पूरी कहानी 

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव दुल्हापुर स्थित प्राथमिक विद्यालय के पीछे चोब सिंह के खेत में एक सागौन लकड़ी से लदी गाड़ी पकड़ी गई थी। बताया जा रहा है कि मौके पर पहुंचे वन विभाग के बीट प्रभारी राहुल यादव सहित अन्य अधिकारियों ने कार्रवाई करने के बजाय कथित तौर पर समझौते का रास्ता अपनाया।


ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 70 हजार रुपये लेकर गाड़ी को छोड़ दिया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो के सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।


वायरल वीडियो बना चर्चा का विषय

घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग अधिकारियों से बातचीत करते और आरोप लगाते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि वीडियो में पैसों की चर्चा भी हो रही है, जिससे संदेह और गहरा गया है।

वीडियो वायरल होने के बाद इलाके में चर्चा का बाजार गर्म है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह पर्यावरण और कानून दोनों के लिए गंभीर खतरा है।


ग्रामीणों का गुस्सा -कार्रवाई नहीं हुई तो करेंगे आंदोलन

गांव के कई लोगों ने खुलकर कहा कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगलों और पेड़ों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभाग ही अगर लापरवाही करेगा तो पर्यावरण कैसे बचेगा।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि वायरल वीडियो की जांच कराई जाए और सच्चाई सामने लाई जाए।


प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

इलाके के लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से नहीं हुई तो लोगों का भरोसा प्रशासन पर से उठ जाएगा।


पर्यावरण के लिहाज से भी गंभीर मामला

विशेषज्ञों का मानना है कि सागौन जैसे कीमती पेड़ों की अवैध कटाई न सिर्फ कानूनन अपराध है बल्कि पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है। लगातार पेड़ों की कटाई से क्षेत्र में हरियाली कम होती जा रही है और इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि अवैध लकड़ी के कारोबार पर समय रहते रोक नहीं लगी तो पूरे क्षेत्र का पर्यावरण प्रभावित होगा।


स्थानीय राजनीति में भी हलचल

घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, जबकि कुछ सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन को ज्ञापन देने की तैयारी शुरू कर दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई पाई गई तो यह मामला बड़ा रूप ले सकता है और कई अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो सकती है।


जांच की मांग और आगे की राह

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि 

वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जाए

संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जाए

अवैध लकड़ी कारोबार पर सख्त कार्रवाई हो

दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा दी जाए

लोगों का कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आएगी और जनता का विश्वास कायम रहेगा।

प्रशासन की चुप्पी — सबसे बड़ा सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों और वायरल वीडियो के बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं? ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप गलत हैं तो विभाग को खुलकर सफाई देनी चाहिए, और यदि सही हैं तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

निष्कर्ष

एटा के दुल्हापुर गांव में सामने आया यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि पर्यावरण संरक्षण पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। वायरल वीडियो के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। अब सबकी नजर प्रशासन और जांच एजेंसियों पर टिकी है कि वे कब और कैसे इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाते हैं।

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