जनपद कासगंज | थाना अमांपुर | गांव लोधीपुर
प्रस्तावना - कानून के दावे बनाम जमीनी हकीकत
उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार सख्ती और कड़े कानूनों का दावा करती है। लेकिन कासगंज जिले के अमांपुर थाना क्षेत्र के गांव लोधीपुर से सामने आई यह घटना कई सवाल खड़े कर रही है। यहां एक महिला के साथ कथित रूप से दुष्कर्म का प्रयास, मारपीट और धमकी की गंभीर वारदात सामने आई है। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस को सूचना देने और थाने में शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे न सिर्फ आरोपी के हौसले बुलंद हुए हैं बल्कि गांव की महिलाओं में भी गहरा डर और आक्रोश देखने को मिल रहा है।
सुबह 5 बजे की घटना - खेत में अकेली महिला पर हमला
पीड़िता के अनुसार, घटना सुबह लगभग 5:00 बजे की है। महिला रोज की तरह शौच के लिए घर से बाहर निकली थी और गांव के पास खेत की ओर गई। तभी गांव के ही एक व्यक्ति, जिसका नाम राजवीर पुत्र कुंवरपाल बताया जा रहा है, ने महिला को अकेला देखकर कथित तौर पर उसे पकड़ लिया। महिला का आरोप है कि आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और दुष्कर्म का प्रयास किया।
महिला के अनुसार, जब उसने शोर मचाने की कोशिश की तो आरोपी ने उसका मुंह दबा दिया और उसे जमीन पर पटक दिया। इस दौरान उसके कपड़े भी फाड़ दिए गए और विरोध करने पर उसकी पिटाई की गई। महिला किसी तरह आरोपी के चंगुल से निकलकर अपने घर पहुंची।
घर तक पीछा - धमकी और फिर मारपीट
पीड़िता का कहना है कि घटना यहीं खत्म नहीं हुई। आरोप है कि आरोपी उसके घर तक पहुंच गया और वहां भी महिला के साथ मारपीट की। साथ ही गंभीर धमकी दी कि यदि उसने पुलिस में शिकायत की तो उसे गांव छोड़ना पड़ेगा। इस धमकी ने पूरे परिवार को डरा दिया, लेकिन महिला ने हिम्मत दिखाई और न्याय की उम्मीद में पुलिस को सूचना दी।
डायल 112 पर कॉल - पुलिस आई लेकिन कार्रवाई नहीं?
पीड़िता ने तुरंत डायल 112 पर सूचना दी। उसके अनुसार पुलिस मौके पर पहुंची जरूर, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद महिला खुद थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, मगर आरोप है कि उसकी तहरीर तक नहीं ली गई।
यह आरोप पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब एक महिला इतनी गंभीर घटना के बाद खुद न्याय मांगने पहुंचती है और उसकी बात तक दर्ज नहीं होती, तो कानून व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा?
डीएम और एसपी कार्यालय तक गुहार - फिर भी सन्नाटा
न्याय की उम्मीद में पीड़िता जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक कार्यालय भी पहुंची। उसने वहां अपनी पूरी आपबीती बताई और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। लेकिन पीड़िता और ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कार्रवाई न होने से आरोपी के हौसले और भी बुलंद हो गए हैं।
गांव में डर का माहौल - महिलाएं अकेले निकलने से डर रहीं
इस घटना के बाद गांव की महिलाओं में गहरा डर बैठ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब महिलाएं अकेले घर से बाहर निकलने से कतराने लगी हैं। खेत, रास्ते और यहां तक कि सुबह-शाम के जरूरी काम भी अब डर के साए में हो रहे हैं।
एक ग्रामीण महिला ने कहा
अगर पुलिस ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं करेगी तो मनचलों के हौसले और बढ़ेंगे। फिर हमारी इज्जत और सुरक्षा कैसे बचेगी?
ग्रामीणों में आक्रोश - पुलिस पर उठ रहे सवाल
गांव में इस घटना को लेकर भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे अपराधी खुलेआम घूमते रहेंगे और महिलाओं की सुरक्षा खतरे में बनी रहेगी। कई लोगों ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं और उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है।
कानून क्या कहता है - कार्रवाई जरूरी क्यों?
भारतीय कानून के अनुसार महिला से छेड़छाड़, दुष्कर्म का प्रयास, मारपीट और धमकी जैसे मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट और महिला सुरक्षा कानून भी कहते हैं कि पुलिस को ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। अगर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होती तो यह न सिर्फ कानून की अवहेलना है बल्कि पीड़िता के अधिकारों का भी उल्लंघन है।
पुलिस का पक्ष - अब तक स्पष्ट बयान नहीं
इस पूरे मामले में पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अगर पुलिस का कोई पक्ष या प्रतिक्रिया आती है तो उसे भी शामिल करना जरूरी होगा ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
क्या महिला की शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज की गई
अगर नहीं, तो क्यों नहीं
आरोपी खुलेआम घूम रहा है तो सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या पुलिस की लापरवाही अपराधियों को बढ़ावा दे रही है
प्रशासन से मांग - सख्त कार्रवाई और सुरक्षा
ग्रामीणों और पीड़िता की मांग है कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच हो। साथ ही गांव में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए ताकि महिलाओं में सुरक्षा की भावना लौट सके।
निष्कर्ष - न्याय की उम्मीद और प्रशासन की परीक्षा
लोधीपुर गांव की यह घटना सिर्फ एक महिला की पीड़ा नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की परीक्षा बन गई है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह संदेश जाएगा कि शिकायत करने के बावजूद न्याय नहीं मिलता। ऐसे में अपराधियों के हौसले बढ़ेंगे और महिलाओं का भरोसा कानून से उठ जाएगा।
अब सबकी नजर प्रशासन और पुलिस पर टिकी है - क्या वे पीड़िता को न्याय दिलाएंगे और आरोपी को सजा देंगे, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

