कासगंज शहर की वो तस्वीर, जिसने आम जनता को परेशान कर दिया है।
जहाँ ट्रैफिक पुलिस की कोशिशें तो दिखती हैं… लेकिन सवाल यह है—फिर भी आखिर क्यों लग रहा है जाम का जाल?
क्यों विलराम गेट चौराहा बन गया है शहर का सबसे बड़ा ट्रैफिक संकट?
और क्यों जनता लगा रही है ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप?
ग्राउंड जीरो की हकीकत
कासगंज का विलराम गेट चौराहा… शहर की धड़कन कहा जाने वाला यह इलाका… आज जाम की गिरफ्त में है।
सुबह का वक्त हो या शाम की भीड़—हर समय यहाँ लंबी-लंबी वाहन कतारें नजर आती हैं।
स्कूल बसें… ऑफिस जाने वाले लोग… बाजार आने वाली जनता… सब एक ही जाम में फंस जाते हैं।
वीडियो विजुअल: लंबी लाइनें, हॉर्न की आवाजें
फोटोज लगा लेना।।।।।
लोगों का कहना है कि कई बार उन्हें आधे घंटे से ज्यादा समय तक जाम में खड़ा रहना पड़ता है।
एम्बुलेंस तक को रास्ता बनाने में संघर्ष करना पड़ता है।
जनता की जुबानी आरोप
अब सुनिए जनता की जुबानी वो बातें… जो इस ट्रैफिक सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार ट्रैफिक पुलिस बीच सड़क पर वाहनों को रोककर फोटो खींचने में लग जाती है।
और जैसे ही सड़क पर रुकावट होती है… पीछे जाम की लंबी लाइन लग जाती है।
ध्यान दें: ये स्थानीय लोगों के आरोप हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा होना बाकी है।)
लोगों का कहना है कि खासकर बाहरी नंबर के वाहनों पर ज्यादा नजर रखी जाती है।
कैमरा ऑन… फोटो क्लिक… और फिर शुरू हो जाती है बातचीत।
इस बीच… ट्रिपल सवारी… भारी वाहन एंट्री… या अन्य नियम उल्लंघन… कई बार नजरअंदाज हो जाते हैं—ऐसा जनता का दावा है।
फोटो चालान या ट्रैफिक जाम?
डिजिटल इंडिया में ई-चालान जरूरी है… नियमों का पालन जरूरी है… लेकिन सवाल उठ रहा है—
क्या फोटो चालान की प्रक्रिया ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित कर रही है?
क्या चालान काटते समय सड़क पर रुकावट बनना सही है?
और क्या इससे जाम की स्थिति और ज्यादा बिगड़ रही है?
चेहरे देखकर चालान
कुछ लोगों ने और भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि चालान काटते समय कभी-कभी पहचान या सिफारिश काम आ जाती है।
और जो आम जनता है… उसका चालान तुरंत हो जाता है।
एक बार फिर—ये सभी बातें स्थानीय लोगों के आरोप हैं, आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
लेकिन अगर ऐसा है… तो यह ट्रैफिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल है।
ड्यूटी के दौरान लापरवाही?
कुछ दुकानदारों और राहगीरों का दावा है कि कई बार ट्रैफिक कर्मचारी साइड में खड़े होकर बातचीत में व्यस्त नजर आते हैं।
और इसी बीच… वाहनों की लाइन बढ़ती जाती है… जाम विकराल रूप ले लेता है।
अगर यह सच है… तो यह शहर की ट्रैफिक सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है।
जाम का असली दर्द
जाम सिर्फ देरी नहीं… बल्कि खतरा भी है।
एम्बुलेंस फंस जाती है… मरीज परेशान होते हैं… बच्चे स्कूल बस में देर तक बैठे रहते हैं…
और व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित होता है।
यानी जाम का असर सिर्फ सड़क पर नहीं… पूरे शहर की जिंदगी पर पड़ता है।
जाम के पीछे असली कारण
विशेषज्ञों की मानें तो जाम के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं… बल्कि पूरा सिस्टम जिम्मेदार हो सकता है—
सड़क की कम चौड़ाई
अवैध पार्किंग
ई-रिक्शा और ऑटो की अधिकता
अतिक्रमण
भारी वाहनों की एंट्री
और ट्रैफिक प्लानिंग की कमी
प्रशासन से जनता की मांग
अब जनता प्रशासन से पूछ रही है—
क्या विलराम गेट चौराहे के लिए कोई स्थायी ट्रैफिक प्लान बनेगा?
क्या निष्पक्ष और पारदर्शी चालान प्रणाली लागू होगी?
क्या अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर सख्ती होगी?
सवाल जनता का?
कासगंज का विलराम गेट चौराहा…
जहाँ कोशिशें दिखती हैं… लेकिन जाम भी भारी है।
जहाँ नियम भी हैं… लेकिन आरोप भी हैं।
अब देखना होगा… क्या प्रशासन इन सवालों का जवाब देगा?
क्या शहर को जाम से राहत मिलेगी?



