कासगंज।
26 जनवरी गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर कासगंज मीडिया हाउस में राष्ट्रभक्ति, पत्रकारिता की गरिमा और सामाजिक जिम्मेदारी का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जो लंबे समय तक जिले के इतिहास में याद रखा जाएगा। भारत की शान तिरंगा जैसे ही मीडिया हाउस परिसर में लहराया, पूरा वातावरण “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “जय हिंद” के नारों से गूंज उठा। हर आंख में देशभक्ति की चमक और हर चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था।
यह केवल एक ध्वजारोहण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह आयोजन पत्रकारिता की आत्मा, विचारधारा, संघर्ष और सम्मान का जीवंत प्रतीक बन गया।
तिरंगे के साथ शुरू हुआ आत्मसम्मान का पर्व
सुबह से ही कासगंज मीडिया हाउस परिसर में चहल-पहल शुरू हो गई थी। अलग-अलग क्षेत्रों से आए पत्रकार, रिपोर्टर, संपादक, कैमरा मैन, डिजिटल मीडिया प्रतिनिधि और वरिष्ठ पत्रकारों की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
जैसे ही तिरंगा फहराया गया, पूरे परिसर में राष्ट्रगान की गूंज सुनाई दी। सभी पत्रकारों ने अनुशासन और सम्मान के साथ राष्ट्रगान में भाग लिया। यह दृश्य केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह देश के लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की एकजुटता का प्रतीक था।
150 से 200 पत्रकारों की ऐतिहासिक मौजूदगी
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत रही 150 से 200 पत्रकारों की एक साथ उपस्थिति।
यह संख्या सिर्फ आंकड़ा नहीं थी, बल्कि यह इस बात का प्रमाण थी कि पत्रकारिता आज भी ज़िंदा है, संघर्ष कर रही है और अपने मूल्यों के साथ खड़ी है।
हर पत्रकार की आंखों में एक ही भावना दिखाई दे रही थी —
पत्रकारिता को जिंदा रखना है”
सच्चाई को दबने नहीं देना है”
लोकतंत्र की आवाज़ बनकर खड़े रहना है”
पत्रकारिता को जिंदा रखना है” -गूंजता रहा यह नारा
पूरे कार्यक्रम के दौरान एक ही वाक्य बार-बार सुनाई देता रहा
पत्रकारिता को जिंदा रखना है”
यह सिर्फ नारा नहीं था, बल्कि आज के दौर की सबसे बड़ी सच्चाई थी।
फर्जी खबरें, यूट्यूब चैनलों की भीड़, अफवाहें, पेड न्यूज़, दबाव की पत्रकारिता - इन सब पर खुलकर चर्चा हुई।
पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि:
सच्ची पत्रकारिता खतरे में है
निष्पक्ष पत्रकारिता संघर्ष कर रही है
ईमानदार पत्रकार अकेला पड़ता जा रहा है
लेकिन इसी मंच से यह भी संकल्प लिया गया कि:
सच्चाई की आवाज़ दबने नहीं दी जाएगी
पत्रकारिता को बिकने नहीं दिया जाएगा
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा
राष्ट्रीय पत्रकार संघ की माह पंचायत भी हुई आयोजित
इस ऐतिहासिक मौके पर राष्ट्रीय पत्रकार संघ की माह पंचायत का भी आयोजन किया गया, जिसने कार्यक्रम को और अधिक गरिमा प्रदान की।
इस पंचायत में पत्रकारों की समस्याओं, सुरक्षा, अधिकारों, मान-सम्मान, फर्जी पत्रकारों की पहचान, पत्रकार सुरक्षा कानून और संगठनात्मक मजबूती जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।
माह पंचायत में उठे प्रमुख मुद्दे:
पत्रकार सुरक्षा कानून की जरूरत
पत्रकारों पर हो रहे हमलों पर चिंता
फर्जी पत्रकारों की पहचान
डिजिटल मीडिया की जिम्मेदारी
पत्रकारिता की विश्वसनीयता बचाने की रणनीति
यह पंचायत केवल चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे भविष्य की कार्ययोजना का आधार बनाया गया।
राहुल वर्मा द्वारा पत्रकारों का सम्मान समारोह
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और गौरवपूर्ण क्षण तब आया, जब राहुल वर्मा द्वारा उपस्थित पत्रकारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
एक-एक पत्रकार को सम्मान मिलते समय माहौल तालियों से गूंज उठा।
यह सम्मान सिर्फ एक कागज नहीं था, बल्कि:
संघर्ष का सम्मान
सच्चाई का सम्मान
ईमानदारी का सम्मान
निष्पक्षता का सम्मान
साहस का सम्मान
कई पत्रकारों की आंखों में भावुकता साफ दिखाई दे रही थी। वर्षों के संघर्ष, उपेक्षा और चुनौतियों के बाद मिला यह सम्मान उनके आत्मसम्मान को नई ऊर्जा दे गया।
पत्रकारों में दिखा अद्भुत जोश और आत्मविश्वास
कार्यक्रम में मौजूद हर पत्रकार के चेहरे पर जोश, आत्मविश्वास और गर्व साफ नजर आ रहा था।
यह कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक आंदोलन जैसा माहौल बन गया था।
युवा पत्रकारों में जोश था,
वरिष्ठ पत्रकारों में अनुभव की गरिमा थी,
डिजिटल मीडिया में बदलाव की सोच थी,
ग्रामीण पत्रकारों में संघर्ष की ताकत थी।
सब एक मंच पर- एक विचार के साथ- एक उद्देश्य के साथ।
राष्ट्रभक्ति और पत्रकारिता का संगम
यह आयोजन एक अनोखा संगम बन गया:
एक ओर राष्ट्रभक्ति
दूसरी ओर पत्रकारिता की चेतना
तिरंगा सिर्फ झंडा नहीं था, वह विचार था।
पत्रकार सिर्फ रिपोर्टर नहीं थे, वह लोकतंत्र के प्रहरी थे।
यह दिन सिर्फ गणतंत्र दिवस नहीं था —
यह दिन पत्रकारिता के गणतंत्र का उत्सव बन गया।
ऐतिहासिक बन गया कासगंज मीडिया हाउस का यह आयोजन
कासगंज मीडिया हाउस पर हुआ यह आयोजन अब सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक इतिहास बन चुका है।
यह आने वाली पीढ़ी के पत्रकारों के लिए एक संदेश है कि
अगर पत्रकार एकजुट हों, तो कोई ताकत सच्चाई को नहीं रोक सकती।
यह सिर्फ खबर नहीं, एक आंदोलन है
यह खबर सिर्फ एक आयोजन की रिपोर्ट नहीं है —
यह एक विचार है
यह एक चेतना है
यह एक संघर्ष है
यह एक आंदोलन है
यह एक आवाज़ है
यह पत्रकारिता की आत्मा है
26 जनवरी को कासगंज मीडिया हाउस पर हुआ यह आयोजन यह साबित करता है कि:
पत्रकारिता अभी जिंदा है
सच्चाई अभी जिंदा है
लोकतंत्र अभी जिंदा है
देशभक्ति अभी जिंदा है
पत्रकारों की एकता अभी जिंदा है
और जब तक ये जिंदा हैं -
भारत का लोकतंत्र मजबूत रहेगा।








